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धान की खेती कैसे करें । dhan ki kheti kaise kare.

 धान की खेती कैसे करें 

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धान की खेती कैसे करें
                                      

धान की खेती कैसे करेें ?

भारत में धान की खेती को मानसून की खेती कहा जाता है भारत मे धान की खेती अधिक तर किसान बरसात के समय करते हैं। कुछ किसान भाई साल में दो बार भी खेती करते है छत्तीसगढ़, केरल,अन्य दक्षिण भारत के कुछ राज्यों में धान की खेती पूरे साल की जाती है, वही उत्तर प्रदेश,उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब,हिमांचल प्रदेश के किसान धान की खेती बरसात के समय करते है। समय कोई भी हो कुछ तरीके अलग हो सकते हैं,लेकिन जो तरीके अधिक उत्पादन दे सकते है, उन तरीको को अपनाना एक सफल किसान की पहचान है। 

धान की उन्नत खेती के तरीके 

धान की खेती के तरीके आज अलग-अलग किसान भाई अपना रहें हैं,और इन तरीकों से पैदवार भी अधिक ले रहे है।ये तरीके इस तरह से हैं।
1.रोपाई
2.(DSR) सीधी बिजाई 
3.श्री विधि (SRI SYTEM)
 ये तरीके आज अधिक उपज के लिए अच्छे तरीके हैं, इनको आप अपने धान की खेती के लिए कीसी एक तरीको को अपना सकते है। 
इन तरीकों से आप खेती कर सकते हैं।लेकिन इन सभी तरीके एक दूसरे से अलग है इस लिए इनको सहो से समझना जरूरी है। एक तरफ से बात करते हैं।
1. रोपाई
    धान की खेती के लिए इस विधि को आज किसान सबसे अधिक अपना रहे है । 
धान की खेति की यह विधि किसान भाई अपना करके अधिक उपज ले रहे है। चलिए इसको आसान तरीके से समझते है।
Dhan ki kheti kaise kare



  धान की खेती की रोपाई विधि 
सबसे पहले अच्छी उपज के लिए अच्छे बीज का होना जरूरी है। अच्छे बीज के लिए 
देसी,hybrid(संकर),या रिसर्च बीज जिस तरह के आप को आसानी से मिल जाएं उनका चयन करें।
इसके अतिरिक्त आप को यह भी ध्यान रखना है कि आप बासमती,मोटा,मध्यान मोटा,पटेल चावल में से किसकी खेती पसंद करेंगे। बीज चयन के बाद 
जलवायु, मिट्टी,पानी ये सब भी ध्यान रखना है।
वीडियो देखिये-

1.जलवायु:- धान के लिए वायु का औसतन तापमान 25℃ से 35℃ के बीच का तापमान आ अनुकूल होता है।धान की सामान्य वृद्धि और विकास के लिए दिन का तापमान 25℃ से 35℃ और रात का तापमान 18℃ से 20℃ के लिए सबसे उपयुक्त होता है।
धान के लिए दोमट,हल्की दोमट और मटियार मिट्टी अच्छी होती है। ऐसे क्षेत्र जहाँ 2 से 4 इंच तक पानी जमा रहता है वहाँ सिंचाई की आवश्यकता नही पड़ती। इस लिए इसकी खेती आप इन परिस्थितियों में कर सकते हैं। 
2.सिचाई:-  धान की खेती खेती अगर बरसात केसमय करते हैं तो सिचाई की अवश्या्यक्ता नही होती लेेकीन बरसात न होने या गर्मी के मौसम में धान की  खेती  लिए 7-10 सिंचाई  आवश्कता   है। 
धान की नर्सरी:- धान की रोपाई के लिए धान की नर्सरी डालना होता है, धान की नर्सरी उन्नतिशील बीज़ का चयन करके 15-25 मई के बीच मे डाल देनी चाहिए।एक  एकड़ के लिए संकर धान का 6kg बीज़, देसी या रिसर्च धान का बीज 12 kg एक एकड़ के लिए डालना चाहिए।
खेत की तैयारी:- धान के लिए खेत की तैयारी धान रोपाई 
 पहले से करनी चाहिए। जिस खेत में धान रोपाई की जानी है  उस खेत में मई महीने में ढैचा या हरी खाद के लिए लोबिया की बुवाई करने से हरी खाद तैयार होगी धान रोपाई के 15=20 पहले ढैचा, लोबिया की खेत मे रोटा वेटर या डिस्क हैरो से जुताई करके खेत मे 4=5 इंच तक 7=8 दिन तक पानी खड़ा रखे जिससे अच्छे से हरी खाद डी कंपोस्ट हो जाएगी। उसके बाद धान रोपाई के पहले खेत की अच्छे से जुताई करके मचाई कर देने के बाद धान रोपाई करने से धान में खरपतवार नही उगते हैं।
धान रोपाई:-
धान रोपाई से पहले धान नर्सरी की जड़ को फफूंद नाशक और कीटनाशक से उपचारित करके रोपाई करने से धान के पौधे फफूंदजनित औऱ कीटनाशक जनित बीमारी लगने से बच जाएंगे। इसके अतिरिक्त खेत को भी कीटनाशक और फफूंद मशक से उपचारित कर ले जिससे मिट्टी में मौजूद कीट और फफूंद से पौधा सुरक्षित रहेगा।इसके लिए फफूंदजनित कॉर्बेंडाज़ेम 12%मैनकॉज़ेब 63% की 500g मात्रा एक एकड़ में डालें और कीटनाशक में क्लोरोपरिफोस 20EC की 1लीटर मात्रा डालें रोपाई के बाद दीमक और सफेद गिडार पौधे की जड़ काली होकर जड़ सड़ने जैसी रोग बीमारी से बचाया जा सकता है।
धान रोपाई के 24 धंटे के अंदर ब्यूटाक्लोर 1लीटर मात्र प्रति एकड़ या प्रितिलाक्लोर 500ml प्रति एकड़ स्प्रे करदेने से खरपतवारों को उगने से रोक सकते है ।

धान में उर्वरक :- धान में भी जरूरी पोषक तत्व के लिए उर्वरक  देना होता है।धान में, फास्फेट, नाइट्रोजन, और 
पोटाश की पूर्ति धान रोपाई के समय से 10 दिन के अंदर जरूर करदे।इसके लिए  DAP,NPK, या सिंगल सुपर फास्फेट को दें। इसके लिए मृदा  परीक्षण के आधार पर उर्वरक देनी चाहिए। या  इस तरह से दें। 

N.P.K.12:32:16 की 70-75KG/एकड़ 
DAP  18:46   की  45-50KG/एकड़ 
SSP की  100-150 KG/एकड़  देनी चाहिए 
DAP देने पर  साथ में MOP 60 की मात्रा  20KG मात्रा मिलाकर 
दें, SSP के साथ यूरिया 35KG + 20KG साथ में मिलाए। 
दूसरी बार रोपाई के 20-35 दिन दिन पर यूरिया  55-50KG के साथ  5KG मोनो जिंक 33% मिलाकर देने से नाइट्रोजन और जिंक की पूर्ति हो जाएगी।यदि आप जिंक धान में नहीं देते है तो खैरा रोग लगता है,जिससे फ़सल को भारी नुकसान होता है। 
धान की अधिक जानकारी के लिए देखें 





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