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गेहूं की नई किस्मों से अधिक पैदावार।Higher yields from new varieties of wheat

 


गेहूं की नई  किस्म देगी अधिक पैदावार। New variety of wheat will give more yield.

आज आधुनिक  भारत में खेती करने के तरीके में जहां बदलवा हुआ है I  दुसरी तरफ किसान अपनी फसल की उपज बड़ा कर आपनी आय भी अधिक कर पाए है । आधुनिक बदलाव में खेती के तरीके, उर्वरक, मशीन, खाद, दवाये तो काम किया है इसके साथ किसान की मेहनत और  कृषि वैज्ञानिक  के नए अनुसंधान  से नई- नई किस्मों को विकसित कर पैदावार बढ़ाने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई है।  
किसान पिछ्ले एक दशक पहले जहां एक एकड़ में जहां गेहूं की 14-15 क्विंटल उपज ले पाता था वही नई किस्मों के आने से गेहूं की पैदावार 25-32 क्विंटल तक ले रहें हैं ।
किसान और अधिक पैदावार ले सकें ।इसके लिए iiwbr,icar के कृषि वैज्ञानिक नई नई किस्मों को इजाद कर रहे हैं । 
कुछ गेहूँ की नई किस्मों को पिछ्ले सत्र 2017_2020 में निकाली गई हैं जो  पुरानी किस्मों से अधिक या ये कहें कि 1.5 से 2 गुना अधिक पैदावार  दे सकती हैं । 
जो नई किस्मों को निकला है उनकी जानकारी यहाँ से प्राप्त करके । उचित किस्म का चयन करके बुवाई करके किसान पैदावार बढ़ा सकते हैं। 

गेहूं की नई किस्में :-

सन 2017 - 2020 तक कुछ अधिक पैदावार देने वाली किस्मों को मैंने सामिल किया है जिनकी बुवाई करके अधिक पैदावार ली जा सकती है। 


गेहूं की नई किस्मों । new varieties of wheat. 

गेहूं की पैदावार बढ़ाने के लिए 
2017_2020 तक जो किस्मों  को निकाला गया है वह हैं। 
1. HD 3171 :- गेहूं की पैदावार बढ़ाने के लिए यह किस्म NEPZ क्षेत्र के लिए है इसकी बुवाई उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, असम, पश्चिम बंगाल उड़ीसा में करके अच्छा उत्पादन लिया जा सकता है। बुवाई का समय नवम्बर से दिसंबर महीने के मध्य तक की जा सकती है। 
इस किस्म को बारानी और सिंचित क्षेत्र की जा सकती है। HD 3171 को 2-3 सिंचाई की आवश्यकता होती है। 
किस्म की विशेषताएं : तना और पत्ती रतुआ रोग प्रतिरोधी किस्म है।इस किस्म में प्रोटीन की पर्याप्त होती है।
उच्च तापमान को सहन करने की क्षमता।
चपाती और ब्रेड के लिए अच्छी।
उपज क्षमता औसतन उपज 29.5 क्विन्टल प्रति हेक्टेयर मिल जाती है। 120-122 दिन में तैयार हो जाती है।

2.HI 1605 पूसा उजाला :- यह गेहूँ की किस्म खास तौर पर CZ क्षेत्र के लिए है। जिसको महाराष्ट्र और कर्नाटक के किसान भाई बुवाई कर सकते हैं। सिंचित क्षेत्र में बुवाई के लिए एक अच्छी किस्म 3-5सिंचाई की आवश्यकता होती है।
प्रोटीन 13.1%आयरन 43PPM, और जिंक 35PPM चपाती के लिए अच्छी, इसकी बुवाई पूरे नवम्बर की जा सकती है। पकने में 105 दिन का समय लेती है इस लिए अन्य क्षेत्रों में इसकी लेट बुवाई दिसंबर के अंत तक कर सकते हैं।


3. HI8759 पूसा तेजस :- यह गेहूं की एक ड्यूरम किस्म है, जो मध्य क्षेत्र CZ के लिए अच्छी किस्म है।
इसकी बुवाई मध्यप्रदेश, गुजरात, राजस्थान के कुछ क्षेत्रों में छत्तीसगढ़ उत्तर प्रदेश के झांसी डिवीजन में की जा सकती है।
इसकी बुवाई नवम्बर के पूरे महीने की सकती है, इस किस्म में 4-5सिंचाई की जरूरत होती है।इसमें प्रोटीन ब1.9%आयरन 42.8 पीपीएम और जिंक 42.8 पीपीएम पीला रंजक 5.7पीपीएम होता है। तना और पत्ती रतुआ रोग प्रतिरोधी किस्म है। इस किस्म से 56.9 क्विन्टल प्रति हेक्टेयर मिल जाती है। गेहूं की यह किस्म  115-120 दिन में पक जाती है जिससे समय से खेत खाली हो जाता है। इस किस्म के काटने के बाद मूंग,उरद की खेती कर सकते हैं। 


4.WH5207 (COW3) :- यह किस्म खास तौर पर तमिलनाडु और उसके आसपास के क्षेत्र के लिए अच्छी है।बुवाई नवम्बर में की जा सकती है। इस किस्म की बुवाई सीमित सिचाई से की जा सकती है। 2 सिचाई से भी बढ़िया पैदवार ले सकते हैं, 41 क्विन्टल तक पैदवार मिल जाती है।तना और पत्ती रतुआ रोग रोधी किस्म है।गेहूं की यह किस्म मात्र 100 दिन में पककर तैयार हो जाती है।


5.  HI1612 :- 2018 में यह किस्म लांच की गई थी। इस किस्म को NEPZ उत्तर पूर्वी क्षेत्र में कर सकते हैं।सिचाई की सीमित आवश्यक्ता होती है। 2-3 सिंचाई स3 भी बढ़िया पैदवार मिल जाती है।इस किस्म की बुवाई नवम्बर महीने में की जा सकती है।रोग रोधी किस्म है।चपाती के लिए अच्छी। रूखा के प्रति सहनशील किस्म है।इस किस्म की पैदावार 37.6 क्विन्टल प्रति हेक्टेयर मिल जाती हैं। इस गेहू की किस्म की बुवाई करने से 122-125 दिन में तैयार हो जाती है।
6. HI8777 :- गेहूं की यह एक ड्यूरम किस्म है।जिसको 2018 में लांच किया गया था। PZ क्षेत्र के लिए चयनित किस्म नवम्बर महीने में बुवाई की जा सकती है। 
सिंचित और बरनी क्षेत्र के लिए ।
बारानी किस्म होने पर भी इस किस्म से 18.5 क्विन्टल प्रति हेक्टेयर पैदवार मिल जाती है। इस लिए इसकी बुवाई असिंचित क्षेत्र के बुवाई करें। मात्र 108 दिन में तैयार हो जाती है।
7. HD3226 :- गेहूं की यह किस्म 2019 में लांच की गई थी। NWPZ क्षेत्र पंजाब, हरियाणा, हिमांचल, जम्मू कश्मीर के कुछ क्षेत्रों राजस्थान के चयनित क्षेत्र, उत्तराखंड के तराई, उत्तर प्रदेश के पश्चिमी क्षेत्र में कर सकते हैं।
यह एक रोग रोधी किस्म है। इसमें तना औऱ पत्ती रतुआ रोग,करनाल बंट,चूर्णिल मिल्ड्यू फ्लैग स्मट तथा पाद सड़न रोग प्रतिरोधी किस्म, चपाती और ब्रेड के लिए उत्कृष्ट। पैदवार एक हेक्टेयर में 57.5 क्विंटल तक मिल जाती है। यह किस्म 140-145 दिन में पककर तैयार जो जाती है।


8.HD 3237 :-  दिन में य़ह किस्म 2019 में लांच की गई किस्म जिसकी बुवाई भारत के उत्तर पश्चिमी क्षेत्र में बुवाई की जा सकती है।इसकी बुवाई पूरे नवम्बर महीने में की जा सकती है। इस किस्म की बुवाई अर्धसिंचित क्षेत्र में की जा सकती है। पीला भूरा रतुआ रोग  प्रतिरोधी किस्म है।एक हेक्टेयर में 48.4क्विंटल उपज किसानों को मिल जाती है। चपाती और ब्रेड के लिए बढ़िया किस्म मानी जाती है। इसकी पकने की अवधि 140-145 दिन है।


Hi 1620  :- 2019  में लांच की गई यह किस्म भारत के उत्तर पश्चिमी क्षेत्र में बुवाई की जा सकती है। यह किस्म HD3226 की तरह की परिस्थितियों के लिए ही है। सूखा से फसल प्रभावित नहीं होती है। उपज 49.1 क्विंटल /हैक्टेयर मिलती है  जो 142-148 दिन में तैयार हो जाती है। बुवी के लिए नवम्बर महीना सबसे सहीं है इस किस्म के लिए।


Hi 1628 :-  यह गेहूं की वेराइटी सन2020 में लांच की गई है। इसकी बुवाई अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से मध्य नवम्बर  कर सकते हैं। जो कि भारत के उत्तर पश्चिमी क्षेत्र के लिए चयनित किया गया है। सिंचित क्षेत्र के लिए एक अच्छी वेराइटी है। जो 4-5सिचाई करने से 40.4 क्विंटल तक पैदावार दे देती है।
रतुआ रोग प्रतिरोधक किस्म है। यह किस्म 145-150 दिन में तैयार हो जाती है।
चपाती और ब्रेड के लिए बेस्ट है।

Hd3249 :- सन 2020 में लांच यह किस्म उत्तर पूर्वी मैदानी क्षेत्रों के लिए बेस्ट है। यानी इसकी बुवाई।
उत्तर प्रदेश, बिहार,झारखंड,आसाम, पश्चिम बंगला उड़ीसा जैसे क्षेत्र के लिए  संतुत है।
बुवाई के लिए नवम्बर महीना सबसे अच्छा रहेगा। यह किस्म बुवाई करने पर 3-5 सिंचाई कर देने पर 48.75 क्विंटल पैदावार देती है।  चपाती और ब्रेड के लिए बेस्ट है। रतुआ रोग की प्रातिरोधी किस्म होने से इस मे भूरा,पीला रोग नही लगते।
यह 120-125 दिन में पकने पर भी बढ़िया पैदावार दे देती है। कम अवधि में पकने के कारण किसान इसकी बुवाई मध्य दिसम्बर में भी कर सकते हैं।

 
 देर से बुवाई की जाने वाली गेहूं की उन्नत किस्में :- 

देर से यदि आप गेहूं की बुवाई करना चाहते हैं है क्योंकि बहुत से किसान ऐसे है जिनकी खेती में दूसरी फैसले खड़ी रहती है जो कि दिसम्बर के अंत मे या जनवरी के पहले पखवाड़े में खेत खाली हो पाता है ऐसे में देर से यही आप गेहूं की बुवाई करना चाहते हैं और अच्छी पैदावार भी लेना कहते है तो इसी दो किस्मे है जिमकी आप बुवाई काफी लेट भी कर सकते हैं।


Hi 1621 :- 

2020  में लांच यह किस्म सिंचित क्षेत्र के लिए निकली गई है।  वेरायटी की खास बात यह है कि देर से बुवाई करने पर भी इसमें रस्ट नही लगता और  औसतन पैदवार 32.8क्विंटल प्रति हैक्टेयर मिल जाती है। चपाती और ब्रेड के लिए अच्छी है। इसकी बुवाई दिसंबर के अंत या जनवरी महीने के प्रथम पक्ष के कर सकते है। क्योंकि मात्रा 100-102 दिन में फसल तैयार हो जाती है। इस लिए देर से बुवाई करने वाले किसानों के लिए बेस्ट किस्म है । आ0 इसकी बुवाई करके काफी बढ़िया उपज भी ले सकेंगें।



Hi 1621 :- 
Hद 3271 किस्म की भी देर से यानी दिसंबर के अंतिम या जनवरी महीने के प्रथम सप्ताह तक कर सकते है।  इसकी बुवाई भारत के उत्तरी मैदानी और तराई दोनों में कर सकते हैं ।  सिंचित क्षेत्र में इसकी उपज 32.5 क्विंटल एक हेक्टेयर में मिल जाएगी। यह मात्र 105 दिन पकने के समय लेती है इस लिए यदि आप  देर से बुवाई के लिए किसी किस्म को लगाना कहिते हैं या गन्ने  को हटाने के बाद लगते है तो यह वेरायटी आप के लिए काफी अच्छी हो जाती है। ब्रेड और रोटी के लिए ठीक ठाक किस्म है।  
यह तो रही गेहूं की कुछ उन्नतशील  प्रजातियों की जानकारी 
आप अपने क्षेत्र के अनुसार सही समय के लिए उचित वेरायटी का चयन करके बुवाई कर अच्छा लाभ ले सकते हैं। 
यह पोस्ट कैसी लगी आप इसके लिए कमेंट में बता सकते हैं साथ ही फॉलो भी कर सकते है। गेहूं की अधिक जानकारी के लिए 
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है।



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